कासे कहूँ

 

 
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जमाने ने गम दिया
तो मैं चीखी- चिल्लायी
पर
जब अपनों ने सितम ढाया
तो आँखें हुई नम
दिल रोया जार-जार
खाई थी चोट अपनों से
जाती मैं कहाँ।।
© इला वर्मा 09-01-2016

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