“बुरा न मानो होली है,” यह ललकार सुनते ही, अनेक खट्टी- मीठी यादों का सैलाब मन में हीलोरे लेने लगता है, जी करता है, एक बार फिर मैं उस पल को वापस खींच लाऊँ और फिर से उस पल की शोख हसीना में तब्दील हो जाऊँ और दोनों हाथों से उस पल की खुशी लुटाऊँ।
हम सब संयुक्त परिवार में रहते थे, उस वक्त परिवार की महत्व समझ में नहीं आती थी, कितनी बार हम तंग हो जाते थे, पर उम्र के इस पङाव पर समझ आई कि की परिवार का महत्व क्या है या यों कहें की, त्योहार घर-परिवार के बीच मनाना अच्छा लगता है, हम उमंग- हर्षोउल्लास से भर जाते हैं और होली तो पर्व है टोली का, जितने लोग उतनी मस्ती।
हमारे चाचा-चाची, बुआ-फूफा, दादा-दादी सभी इकठ्ठे होते थे होली पर्व साथ मनाने के लिए और हम बच्चों की लाॅटरी खुल जाती थी। ढेर सारे पैसे इकठ्ठे हो जाते थे और हम सब दुकान पर धावा बोल देते। रंग-बिरंगी पिचकारी, टोपी, रंग और गुलाल-अबीर हम सब ढेरों खरीद लेते और हमारी होली एक सप्ताह पहले ही शुरू हो जाती थी। हम एक- दूसरे पर रंगों की बौछार करते, घर- आँगन की भी पुताई हो जाती थी, रंगो की होली से,बङे-बुजुर्ग भी पीछे नहीं रहते थे। बाल्टी में हम बच्चे रंग घोलते और पिचकारी से आने जाने वाले पर पटाने के बाद, “बुरा न मानो होली है” चिल्लाकर कूदते और शोर मनाते और घर के सयाने मौका देखते बाल्टी लेकर गायब हो जाते और एक-दूसरे को स्नान करा आते।
होली का शोर-शराबा अच्छा लगता,एक दूसरे के पीछे दौङना, चीखना चिल्लाना, एक दूसरे को रंग से सराबोर कर देने का मजा ही कुछ और होता था।
मुझे याद है, घर की सभी औरतें तरह-तरह के पकवान बनाने में जुटी रहती थी और उनमें एक होङ होता था कि की किसकी पकवान उमंदा बनी है, परिवार के बङे कुछ सगुण देते और तारिफों की पुल बाँध देते। घर आँगन में पर्व के दौरान एक खुशी की लहर दौङती जो हम आज एकल परिवार में महसूस नहीं करते।
मुझे याद आते हैं वे पल होलिकादहन से पहले वाली रात, जब मुहल्ले के लङकों की टोली निकलती लकङी और गोबर के उपले इकठ्ठे करने और वे अपनी शैतानियों से बाज नहीं आते। वे घरों के बाहर पङे कुर्सी- चौकी और नेम प्लेट भी उठा कर दहन कर देते। जब तक लोग खोज शुऱु करते तब तक वह स्वाहा हो चुका होता था।
बुरा न मानो होली है, कह कर बहुत सारी बातें हो जाती थी, उस वक्त लोग भी बातों की तुल नहीं देते थे, आया राम गया राम कह बातों पर विराम लग जाता था।
हम बच्चों का तो प्रिय त्यौहार होली था, छुट कर हम सब रंग में सराबोर होते, फटे- पुराने कपङे पहन कर हम होली खेलने के लिए गुट बनाकर निकलते, बाल्टी, टीन पिचकारी, तबला बजानै के लिए बरतन, सब अपने पास होता। घर-घर जाकर रंग खेलते और फिर हमारी गुट में शामिल होकर आगे बढते, होली के गीत गाकर नाच गाना भी होता।
दोपहर तक सब अपने-अपने घर वापस होते और लग जाते रंग छुङाने में, माँ के आज्ञाकारी बच्चे जो तेल लगाकर खेलने जाते, उन्हें ज्यादा मसक्कत नहीं करनी पङती थी, पर जो कुछ हमारी संख्या में आते, उनके रंग साफ होने में दो-तीन दिन लग जाते।
शाम में हम सब सफेद पोशाक में तैयार हो कर पाॅकेट में गुलाल अबीर भर कर एक बार फिर हम हो हल्ला करते हुए रंगों का जंग एलान कर देते और जुट जाते एक दूसरे पर बौछार करने।कहने के लिए सुखा रंग होता पर पुताई गीले रंगों से कम नहीं होता।
स्वादिष्ट पकवान की तो झङी लग जाती, पुआ, मीट,दही भल्ले और मीठे पकवान हर घर में परोसा जाता और हम छुट कर खाते।
होली पर्व तो वही रही पर उल्लास भंग हो चुकी है, लोगों का ध्यान भौतिकता की ओर ज्यादा है और पर्व के प्रति उल्लास जाती रही है।
बङे हुए तो क्या हुआ, हम खेलेगें होली और मिटा डालेगें मन की उदानसीनता को और खेलेगें, कुदेगें इस होली, बंद उन्माद को खुली हवा में पनाह देगें, इस होली, मलेगें बालों और गालों में पैराशुट तेल और बचेगें रंग छुङाने के तकलीफों से और गायेगें होली मिलन के गीत परिवार और दोस्तों की टोली में, “रंग बरसे भीगे चुन्नर वाली रंग बरसे”
“I’m pledging to #KhulKeKheloHoli this year by sharing my Holi memories atBlogAddain association with Parachute Advansed.”
Dark clouds hovers Sprawling gloom all over A silent voice Deep within me “Whispers” Am I going to be exempted, From the redemption of fate. Off and On It blesses me with intricacies Of health I fight tight Conquering the ongoing With a wide smile Trampling down forever. Other Stands in a queue Waiting for…
If you follow the routines mentioned above then you don’t need to spend extra bucks or hit gym to lose your extra pounds nor you will need to curb your regular diet and crave for your favorite dishes. Avoid eating out or relishing on junk food …Yes, do check out that you take healthy…
Deep seated fear made her wary The dreams that followed her was scary He dawned in her life To make her his wife But she was in no mood to make merry. ********************************************************************************* He had a phobia of flying Friends requested to keep trying Turbulence in mid-air shook the airbus He caught the…
Life is full of twists and turn and each day is a new day. I believe that each minute of life is different from the passed one that just passed. Hope everyone agrees what I mean to say. We run from changes in life, but change is inevitable though it is so miniscule that many…
2 Comments
Holiday to khulke khelna hain. I plan to have loads of fun and play safe too.Great food ,fun and family .That's Holi for me
Holiday to khulke khelna hain. I plan to have loads of fun and play safe too.Great food ,fun and family .That's Holi for me
Thank U