हमारी लाडली

चंचल और चपल, नाजुक और कोमल मनमोहिनी यही हैं पहचान हमारी लाडली की ॥ घर आँगन गुलशन गुलशन रहे इसके आगमन से फिर भी समाज को नहीं भाती जन्म हमारी लाडली की ॥ भूल जाते हैं लोग यही है सृष्टि रचने वाली इसी ने हमें जन्म दिया और बढाया घऱ संसार ॥ बालपन में बापू

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