घना कोहरा,  बर्फीली
ठण्ड,
ठिठुरते नन्हें फरिश्ते, तन
पर कपङे कम,
बटोरी लकङियों से,
अंगीठी जलाकर,

मालिस करती माँ।।

© इला वर्मा 06-01-2016

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