Wednesday, December 30, 2015

कठोर सत्य।।

 

सांस थमते,

अस्थी और अस्तित्व,

पंचतत्व में विलिन,

रह गयी सिर्फ,

ख्याति तुम्हारी,

जिन्हें याद कर

लोग होते गमगीन।।

© इला वर्मा 29/12/2015

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