Thursday, November 19, 2015

जीवन की अनमोल धारा

अंबर में लालिमा छाई,

फटने लगी पौ,

किरणों की उष्णता से,

पनप उठा लौ,

कण कण में,

जीवन का हुआ संचार,

प्रफुल्लित हुआ यह घर-संसार।।

 

कलियों ने ली अंगङाई,

रंग बिरंगी पंखूरी फैलायी,

मदमाती तितलियाँ नाच उठी,

चिङियों के कलरव से,

गूँज उठी बगिया में शहनाई।।

 

नमन है,

नतमस्तक है,

यह जग सारा,

कण-कण में सृजन करता

जीवन की अनमोल धारा।।

 

वरदान है,

अमूल्य है,

ये सू्र्य,

सींचता अपनी रौशनी से,

संचार कर,

संवार कर,

यह जग सारा।।

इला वर्मा 18/11/2015

 

 

7 comments:

  1. कलियों ने ली अंगङाई,

    रंग बिरंगी पंखूरी फैलायी,

    मदमाती तितलियाँ नाच उठी,

    चिङियों के कलरव से,

    गूँज उठी बगिया में शहनाई।।
    बहुत सुन्दर शब्द !!

    ReplyDelete
  2. You have a great blog. amazing content and presented with nice theme. keep blogging!

    ReplyDelete
  3. I would like to take the liberty to suggest you to have a 'about' page on top of your blog ..helps visitor know about you and your blog better

    ReplyDelete
  4. For sure will do. Actually I have migrated from blogspot to word press and I may have lost some data. will update soon. Thanks for the suggestion.

    ReplyDelete