दिल ने कुछ कहा
कुछ हमसे कुछ तुमसे
हमने सुन कर मुस्कुराया
तुम गुमसुम बन बैठे ।।

हमारी मुस्कुराहट ने मचा दी तबाही
बिना बात के नासुर बन गए
क्या मेरी यही सजा थी मुस्कुराने की
मैंने तो अपनी बर्बादी पर मुस्कुराया
वो समझ बैठे मैंने उनकी खिल्ली उङा दी
मैंने तो सोचा था मेरी मुस्कुराहट
उनकी दुनिया को रंगनियों से सजा देगी
अंजाने में मैंने तो अपनी दुनिया ही उजाङ दी ।।

दिल ने कुछ कहा
कुछ हमसे कुछ तुमसे
इतनी तकल्लुफ से तो अच्छा था
पूछ लेते मुझ से मेरी मुस्कुराने का राज
गम को धुएें में उङा कर
कुछ कहकहे सुना देती
तो तुम भी मेरे संग मुस्कुरा देते
मैं भी कुछ क्षण के लिए
अपने गम को भूल कर
तुम्हारे साथ ठहाके लगा लेती।।

मेरी भी शिकन दूर हो जाती
और तुम भी मुस्कुरा देते
दूरियाँ नजदिकीयाँ में बदल जाती
और दिल तन्हां ना रहता
दिल ने कुछ कहा
कुछ हमसे कुछ तुमसे।।

 —– इला

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