Thursday, October 12, 2017

सीआईआई लीडरशिप कान्क्लेव 2017



- 'पतंजलि के सीएमडी आचार्य बालकृष्ण ने आयुर्वेद की कई गलतफहमियां दूर की

इंदौर। विभिन्न क्षेत्रों के देशभर के दिग्गज आज अम्बर कन्वेंशन सेंटर में कान्फेडरेशन आफ इंडियन इंडस्ट्री (सीआईआई) द्वारा आयोजित 'लीडरशिप कान्क्लेव 2017' में शरीक हुए। इस कन्वेंशन का उद्देश्य बीते दशक में प्रदेश के आर्थिक तथा सामाजिक विकास में आए उल्लेखनीय बदलाव को आगे बढाकर विश्व को गति प्रदान था। साथ ही अपने-अपने क्षेत्र में सफल लीडर्स द्वारा आने वाले कल के लीडर्स की राह प्रशस्त करना रहा।



  इस आयोजन का प्रारंभिक उद्बोधन पतंजली के सीएमडी आचार्य बालकृष्ण ने देते हुए पतंजलि की विकास यात्रा की बारीकियाँ बताई। उन्होंने उन सवालों  दिया, जो पतंजलि को लेकर अकसर उठाए जाते हैं। 40 मिनिट के अपने उद्बोधन में आचार्य बालकृष्ण ने अपने उद्योग समूह के उद्देश्य  स्पष्ट किया कि पतंजलि सिर्फ व्यापार करने बाजार में नहीं उतरा है। हम तो आयुर्वेद के नाम पर उपभोक्ताओं को जिस तरह बरगलाया जाता है, उससे उपभोक्ताओं का पीछा छुड़ाने आए हैं। उन्होंने कई उदाहरण भी दिए कि आयुर्वेद के नाम पर किस तरह छला जाता है। टूथ पेस्ट में तुलसी पत्ती मिले होने के बारे में उन्होंने स्पष्ट किया कि तुलसी की पत्ती को सीधे निगला जाता है, क्योंकि चबाने से तुलसी से जो रस निकलता है वो दांतों के लिए नुकसानदेह है। फिर भी बाजार में तुलसी वाला टूथ पेस्ट बेचा जाता है। उन्होंने कहा कि बाजार में ऐसे कई उत्पाद हैं, जिन्हें आयुर्वेदिक बताया जाता है, पर उनमें केमिकल मिले होते हैं।




   कानक्लेव को संबोधित करते हुए आचार्य बालकृष्ण ने कहा कि योग कोई बाबा रामदेव ने शुरू नहीं किया था, ये भारत के ऋषियों की चिर प्राचीन परंपरा है। उन्होंने आयुर्वेद और योग को जन-जन तक पहुंचाने का कार्य किया। अभी तक कंपनियां लोगों को तरह-तरह के सपने दिखाकर प्रोडक्ट बेचती थी। आप सब जानते हैं कोई गोरे रंग का सपना दिखाता था तो कोई कुछ और सपना दिखाकर चीजें बेचता था। हमारी पहचान भारत की ऋषि परंपरा से है, इसलिए हमने संस्थान भी स्थापित किया तो उसे ऋषि पतंजलि के नाम पर बनाया।





  हिंदी भाषा को जनमानस की भाषा बनाने का अभियान चलाने वाले जाने-माने पत्रकार तथा स्पीकर रिसर्च इनिशिएटिव पार्लियामेंट के सलाहकार राहुल देव ने अपने उद्बोधन में इस भ्रम को दूर करने की अपील की कि विकास की राह सिर्फ अंग्रेजी से ही खुलती है। उन्होंने ऐसे कई उदाहरण दिए जिनसे स्पष्ट होता है कि हिंदी क्षेत्र से भी विकास की धारा बहती है। उन्होंने कहा कि जो देश विकास कर रहे हैं, जरुरी नहीं कि  आधार अंग्रेजी है। जब वे कर सकते हैं, तो हम क्यों नहीं। यदि हमने अंग्रेजी के सामने हिंदी को दोयम भाषा समझने की गलती की, तो 2050 तक इस देश से भारतीयता ही ख़त्म हो जाएगी। 




प्रदेश के उद्योग मंत्री राजेंद्र शुक्ल ने प्रदेश के औद्योगिक विकास में उद्योगपतियों का उल्लेख किया और इंदौर की तारीफ की कि इस शहर ने देश और दुनिया में अपनी अलग पहचान। थायरोकेयर टेक्नोलाॅजिस लिमिटेड के अध्यक्ष तथा प्रंबंध निदेशक डाॅ. . वेलुमनी ने अपने उद्बोधन में थाइरोकेयर की विकासगाथा सुनाई। उन्होंने कहा कि हमने आने वाली चुनौतियों को अवसर समझा। गोवा शिपयार्ड लिमिटेड के अध्यक्ष तथा प्रबंध निदेशक रियर एडमिरल (सेनि) शेखर मित्तल ने अपनी कंपनी में आए उतार-चढ़ाओ बताते हुए कहा कि हम नीचे आकर ऊपर आए हैं, क्योंकि हमने सिर्फ प्लान नहीं बनाए, बल्कि सीधे काम किया है। जे वॉल्टर थॉमसन की चीफ स्ट्रैटेजी ऑफीसर बिन्दू सेठी ने कहा कि देश में महिलाओं की इमेज बताते हुए कहा कि समाज का नजरिया बदलने की जरुरत है।





    एक्सिस बैंक लिमिटेड के चीफ इकानाॅमिस्ट सौगाता भट्टाचार्य ने कहा कि लीडरशिप में हमें फाइनेंस और इकोनॉमी की चुनौतियों का उल्लेख किया। बालाजी वेफर्स प्राइवेट लिमिटेड के चंदूभाई विरानी ने अपनी सफलता की सुनाई। उन्होंने बताया कि किस तरह विदेशी कंपनियों के सामने उन्होंने अपने देसी उत्पाद को उसी गुणवत्ता के मापदंडों पर खरा रखकर मुकाबला किया और और देश के पश्चिमी हिस्से पर 65% मार्केट शेयर स्थापित किया। सीआईआई वेस्टर्न रीजन काउंसिल के तात्कालिक पूर्व अध्यक्ष तथा पिनेकल इंडिस्ट्रज के सीएमडी सुधीर मेहता ने इस लीडरशिप कॉन्क्लेव की विषयवस्तु से उपस्थित लोगों को अवगत कराया। कार्यक्रम की शुरुआत सीआईआई के मध्यप्रदेश के स्टेट चैयरमेन अंशुल मित्तल ने की और अंत में आभार भी व्यक्त किया।   




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