कठोर सत्य।।

  सांस थमते, अस्थी और अस्तित्व, पंचतत्व में विलिन, रह गयी सिर्फ, ख्याति तुम्हारी, जिन्हें याद कर लोग होते गमगीन।। © इला वर्मा 29/12/2015

दिल लगा बैठे!!!

अनभिज्ञ थे हम दुनिया के रस्मों-रिवाजों से कस्बें की मोहतरमा से दिल लगा बैठे।। © इला वर्मा 29/12/2015              

ख्यालात

  क्युँ नवाजा उन्हें, कुदरत की खुबसूरत नियामत से, जिन्हें कद्र नहीं, कुदरत के अनमोल सौगात संभालने की।।© इला वर्मा 27/12/2015